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पृथ्वी का भोगोलिक मानचित्र: वेद व्यास द्वारा

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प्राचीन सम्रद्ध भारत अस्तोमा सद्ग्मया| तमसोमा ज्योतिरग्मया| मृत्योर्मा अम्रुतान्गमया| ॐ शांति शांति शांतिही || बुधवार, 3 अप्रैल 2013 पृथ्वी का भोगोलिक मानचित्र: वेद व्यास द्वारा यदि पृथ्वी के भोगोलिक मानचित्र की बात की  जाये तो माना  जाता है की क्रिस्टोफ़र कोलंबस (31 अक्टूबर 1451 – 20 मई 1506) ने पृथ्वी  का प्रथम भोगोलिक मानचित्र बनाया अर्थात  लगभग  525 वर्ष पूर्व । अब में मुद्दे पर आता हूँ । महाभारत का समय कम से कम 5000 वर्ष ईसा पूर्व अर्थात आज से कम से कम 7000 वर्ष पूर्व का माना  जाता है उसी समय महान दिव्यद्रष्टा ऋषि वेद व्यास ने महाभारत नामक धार्मिक व एतिहासिक ग्रन्थ की रचना की । जिसमे उन्होंने स्पष्ट रूप से पृथ्वी की भोगोलिक स्थति  का उल्लेख किया । उन्होंने लिखा : सुदर्शनं प्रवक्ष्यामि द्वीपं तु  कुरुनन्दन। परिमण्डलो महाराज द्वीपोऽसौ चक्रसंस्थितः॥ यथा हि पुरुषः पश्येदादर्शे मुखमात्मनः। एवं सुदर्शनद्वीपो दृश्यते चन्द्रमण्डले॥ द्विरंशे पिप्पलस्तत्र द्विरंशे च शशो महान्। —वेद व्यास, भीष्म पर्व, महाभारत अर्थ...

The Vaimanika Shastra Secrets

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प्राचीन सम्रद्ध भारत अस्तोमा सद्ग्मया| तमसोमा ज्योतिरग्मया| मृत्योर्मा अम्रुतान्गमया| ॐ शांति शांति शांतिही || रविवार, 19 मई 2013 The Vaimanika Shastra Secrets The Vaimanika Shastra is an early 20th century Sanskrit text about the science involved with the study, design, and manufacturing of airflight-capable machines, or the techniques of operating aircraft and rocketry within the atmosphere.It claimed to be obtained by mental channeling, about construction of vimānas, the “chariots of the Gods”. The existence of the text was revealed in 1952 by G. R. Josyer, according to whom it is due to one Pandit Subbaraya Shastry, who dictated it in 1918-1923. A Hindi translation was published in 1959, the Sanskrit text with an English translation in 1973.                                                          click to...

नौका शास्त्र

प्राचीन सम्रद्ध भारत अस्तोमा सद्ग्मया| तमसोमा ज्योतिरग्मया| मृत्योर्मा अम्रुतान्गमया| ॐ शांति शांति शांतिही || गुरुवार, 30 मई 2013 नौका शास्त्र समुद्र यात्रा भारतवर्ष में प्राचीन काल से प्रचलित रही है। महर्षि अगस्त्य समुद्री द्वीप-द्वीपान्तरों की यात्रा करने वाले महापुरुष थे। इसी कारण अगस्त्य ने समुद्र को पी डाला, यह कथा प्रचलित हुई होगी। संस्कृति के प्रचार के निमित्त या नए स्थानों पर व्यापार के निमित्त दुनिया के देशों में भारतीयों का आना-जाना था। कौण्डिन्य समुद्र पार कर दक्षिण पूर्व एशिया पहुंचे। मैक्सिको के यूकाटान प्रांत में जवातुको नामक स्थान पर प्राप्त सूर्य मंदिर के शिलालेख में महानाविक वुसुलिन के शक संवत्‌ ८८५ में पहुंचने का उल्लेख मिलता है। गुजरात के लोथल में हुई खुदाई में ध्यान में आता है कि ई. पूर्व २४५० के आस-पास बने बंदरगाह द्वारा इजिप्त के साथ सीधा सामुद्रिक व्यापार होता था। २४५० ई.पू. से २३५० ई.पू. तक छोटी नावें इस बंदरगाह पर आती थीं। बाद में बड़े जहाजों के लिए आवश्यक रचनाएं खड़ी की गएं तथा नगर रचना भी हुई। प्राचीन काल से अर्वाचीन काल तक के नौ निर्माण कला का उल्लेख प्रख्य...

भारत की विश्व को देन : गणित शास्त्र

प्राचीन सम्रद्ध भारत अस्तोमा सद्ग्मया| तमसोमा ज्योतिरग्मया| मृत्योर्मा अम्रुतान्गमया| ॐ शांति शांति शांतिही || गुरुवार, 30 मई 2013 भारत की विश्व को देन : गणित शास्त्र गणित शास्त्र की परम्परा भारत में बहुत प्राचीन काल से ही रही है। गणित के महत्व को प्रतिपादित करने वाला एक श्लोक प्राचीन काल से प्रचलित है। यथा शिखा मयूराणां नागानां मणयो यथा। तद्वद् वेदांगशास्त्राणां गणितं मूर्धनि स्थितम्‌।। (याजुष ज्योतिषम) अर्थात्‌ जैसे मोरों में शिखा और नागों में मणि सबसे ऊपर रहती है, उसी प्रकार वेदांग और शास्त्रों में गणित सर्वोच्च स्थान पर स्थित है। ईशावास्योपनिषद् के शांति मंत्र में कहा गया है- ॐपूर्णमद: पूर्णमिदं पूर्णात्‌ पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते।। यह मंत्र मात्र आध्यात्मिक वर्णन नहीं है, अपितु इसमें अत्यंत महत्वपूर्ण गणितीय संकेत छिपा है, जो समग्र गणित शास्त्र का आधार बना। मंत्र कहता है, यह भी पूर्ण है, वह भी पूर्ण है, पूर्ण से पूर्ण की उत्पत्ति होती है, तो भी वह पूर्ण है और अंत में पूर्ण में लीन होने पर भी अवशिष्ट पूर्ण ही रहता है। जो वैशिष्ट्य पूर्ण के वर्णन में है वह...

प्राचीन भारत के विमान

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प्राचीन सम्रद्ध भारत अस्तोमा सद्ग्मया| तमसोमा ज्योतिरग्मया| मृत्योर्मा अम्रुतान्गमया| ॐ शांति शांति शांतिही || गुरुवार, 2 मई 2013 प्राचीन भारत के विमान प्राचीन विमानों की दो श्रेणिया इस प्रकार थीः- मानव निर्मित विमान, जो आधुनिक विमानों की तरह पंखों के सहायता से उडान भरते थे। महर्षि भारद्वाज के शब्दों में पक्षि यों की भान्ती उडने के कारण वायुयान को विमान कहते हैं। वेगसाम्याद विमानोण्डजानामिति ।। विमानों के प्रकार:- शकत्युदगमविमान अर्थात विद्युत से चलने वाला विमान, धूम्रयान(धुँआ,वाष्प आदि से चलने वाला), अशुवाहविमान(सूर्य किरणों से चलने वाला), शिखोदभगविमान(पारे से चलने वाला), तारामुखविमान(चुम्बक शक्ति से चलने वाला), मरूत्सखविमान(गैस इत्यादि से चलने वाला), भूतवाहविमान(जल,अग्नि तथा वायु से चलने वाला)। आश्चर्य जनक विमान, जो मानव निर्मित नहीं थे किन्तु उन का आकार प्रकार आधुनिक ‘उडन तशतरियों’ के अनुरूप है। विमान विकास के प्राचीन ग्रन्थ भारतीय उल्लेख प्राचीन संस्कृत भाषा में सैंकडों की संख्या में उपलब्द्ध हैं, किन्तु खेद का विषय है कि उन्हें अभी तक किसी आधुनिक भाषा में अनुवादित ही नहीं किया गया...

महाभारत समय में प्रयोग हुए विमानों के जैसा विमान

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प्राचीन सम्रद्ध भारत अस्तोमा सद्ग्मया| तमसोमा ज्योतिरग्मया| मृत्योर्मा अम्रुतान्गमया| ॐ शांति शांति शांतिही || शुक्रवार, 17 मई 2013 महाभारत समय में प्रयोग हुए विमानों के जैसा विमान चित्र में दिख रही गुफा अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिको को मिली थी, गुफा में भारत के महाभारत समय में प्रयोग हुए विमानों के जैसा विमान मिला है , जो कि संस्कृत में लिखे ग्रंथो के चित्र से हूबहू मेल खता है जब सैनिक अन्दर गुफा में गए तो विमान अपनी स्वचालित प्रणाली की वजह से चालु हो गया एवं आठ अमेरिकी सैनिक इसकी विकिरण की चपेट में आ गए!! जिसकी बाद दुनिया भर के राष्ट्रधीश इस जगह का मुआयना करने पहुचे जिसमे बराक ओबामा से लेकर फ्रांस के निकोलस सरकोजी भी अफगानिस्तान यात्रा पर अचानक पहुच गए !! इस बारे में Russian Foreign Intelligence Service (SVR) report द्वारा 21 December 2010 को एक रिपोर्ट पेश की गयी की जिसमे बताया ये विमान द्वारा उत्पन्न एक रहस्यमयी Time Well क्षेत्र है जिसकी खतरनाक electromagnetic shockwave से ये जवान मारे गये या गायब हो गये!! विमान स्वयं ही चालु हो कर तेज प्रकाश का उत्सर्जन करता है, ग्रंथो में ऐसे व...