भागवत्, वैष्णव एवं शैव धर्म से परीक्षाओं में पूछे जाने वाले तथ्य
भागवत्, वैष्णव एवं शैव धर्म से परीक्षाओं में पूछे जाने वाले तथ्य
♨️भागवत् धर्म
🌀6ठी‘ शताबदी ई०पू० में ब्राह्मणवाद एवं कर्मकांडीय जाटिलता के विरोध में इस धर्म का उदय हुआ,
🌀इस धर्म ने ब्राह्मणवाद में भक्ति एवं पूजा का समावेश करवाया
🌀प्रारंभ–‘महाभारत‘ के नारायण उपस्थान प्रसंग से,
♨️आरंभिक सिद्धांत–
👉इस धर्म के आरंभिक सिद्धांत गीता में मिलते हैं।
👉वासुदेव–महाकाव्य महाभारत ‘ भागवत् धर्म‘ को एक दिव्यधर्म के रूप में प्रतिष्ठापित करता है तथा विष्णु का उल्लेख ‘वासुदेव‘ के रूप में करता है।
♨️अवतार–भागवत् धर्म में विष्णु के अवतारों
👉पुरुषावतार,
👉गुणावतार एवं
👉लीलावतार का उल्लेख है।
🌀 इस धर्म को वैष्णव धर्म की आरंभिक अवस्था माना जाता है।
♨️वैष्णव धर्म (VAISHNAVISM)
👉वैष्णव धर्म का विकास छठी शताब्दी ई०पू० में हुआ।
👉इस धर्म का विकास भागवत धर्म से हुआ है।
👉वैष्णव धर्म की आरंभिक जानकारी छांदोग्य उपनिषद से मिलती है।
👉मथुरा के कृष्ण
(जिनके पिता वसुदेव यादव वंश के वष्णि या सतवत् शाखा के प्रमुख थे) ने ‘वैष्णव धर्म‘ की स्थापना की।
👉गुप्तकाल में वैष्णव धर्म लोकप्रियता की चरम सीमा पर पहुँचा।
👉मेगास्थनीज रचित इंडिका से ज्ञात होता है कि मथुरा के लोग हेराकुलिज का विशेष आदर करते थे।
👉‘हेराकुलिज‘ कृष्ण का यूनानी नाम है।
♨️वैष्णव धर्म विष्णु–पूजा पर आधारित है तथा अवतारवाद में विश्वास करता है।
♨️ब्राह्मण ग्रंथों में विष्णु के 39 अवतारों का उल्लेख है
👉जिनमें 10अवतारों को वैष्णव धर्म में मान्यता दी गई है।
♨️मतस्य पुराण में विष्णु के 10 अवतारों का उल्लेख इस प्रकार है–
👉मतस्य,
👉वामन,
👉परशुराम,
👉कच्छप,
👉राम,
👉कलि,
👉वराह,
👉कृष्ण,
👉नृसिंह तथा
👉बुद्ध।
♨️विदिशा से प्राप्त ‘नगर–स्तंभ लेख‘ से ज्ञात होता है कि यूनानी राजदूत हेलियोडोरस कृष्ण का उपासक था।
♨️चंद्रगुप्त–II विक्रमादित्य तथा अन्य गुप्त सम्राटों ने परमभागवत् जैसी उपाधियाँ धारण की।
♨️चंद्रगुप्त–II तथा समुद्रगुप्त के सिक्कों पर विष्णु के वाहन गरुड़ का चित्र अंकित है।
♨️गरुड़ मुद्रा का उदाहरण गाजीपुर जिले के भितरी नामक स्थान से प्राप्त हुआ है।
♨️गुप्तकालीन मुद्राओं पर वैष्णव धर्म के अन्य प्रतीक
👉शंख,
👉चक्र,
👉गदा,
👉पद्म तथा
👉लक्ष्मी
भी प्राप्त हुए हैं।
♨️गंगधर अभिलेख में विष्णु को मधुसूदन कहा गया है।
♨️चंद्रगुप्त विक्रमादित्य–II ने विष्णुपद पर्वत पर विष्णुध्वज की स्थापना की।
♨️स्कंद गुप्त के जूनागढ़ तथा बुद्धगुप्त के एरण अभिलेखों का आरंभ विष्णु–स्तुति से होता है।
♨️गुप्तकाल में वैष्णव धर्म से संबंधित सबसे महत्वपूर्ण अवशेष देवगढ़ (झांसी) का दशावतार मंदिर है।
♨️दशावतार मंदिर में ही शेषनाग की शैय्या पर विश्राम करते हुए नारायण विष्णु को दिखाया गया है।
♨️एक अध्ययन के अनुसार गुप्तकाल में वैष्णव धर्म भारत के प्रत्येक क्षेत्र में फैला तथा
👉दक्षिण–पूर्व एशिया,
👉हिंद चीन,
👉 कम्बोडिया,
👉मलाया एवं
👉इंडोनेशिया तक इसका प्रचार हुआ।
♨️शैव धर्म (SHAIVISM)
👉भगवान शिव से संबंधित धर्म को शैव धर्म एवं उनके अनुयाइयों को शैव कहा गया।
👉 लिंग पूजा का पहला पुरातात्विक साक्ष्य सिंधु सभ्यता के अवशेषों से प्राप्त होता है।
👉लिंग पूजा का पहला साहित्यिक साक्ष्य मतस्य पुराण से प्राप्त होता है।
👉शिव के लिए ऋग्वेद में रुद्र शब्द का प्रयोग किया गया है।
👉भव,
👉भूपति,
👉पशुपति एवं
👉शर्व
आदि शिव के नाम हैं जिनका उल्लेख अथर्ववेद‘ में किया गया है।
♨️लिंगोपासना का स्पष्ट उल्लेख महाभारत के अनुशासन पर्व में भी है
♨️तथा उत्तर भारत में इस धर्म को गुप्त सम्राटों एवं
♨️दक्षिण भारत में पल्लव शासकों से विशेष संरक्षण प्राप्त हुआ।
♨️पाशुपत शैव–
👉इस धर्म के अनुयायी शिव के पशुपति रूप की उपासना करते थे
👉पाशुपत संप्रदाय शैवों का सबसे प्राचीन संप्रदाय है।
👉पाशुपत संप्रदाय की स्थापना लकुलीश ने की थी,
👉जिसे भगवान शिव का ही एक अवतार माना गया है।
👉पाशुपत संप्रदाय में भगवान शिव के 18 अवतारों को मान्यता दी गई है।
👉पाशुपत संप्रदाय के अनुयायी पंचार्थिक कहलाते थे।
👉पाशुपत संप्रदाय का प्रमुख सिद्धांतग्रंथ पाशुवत सूत्र है।
♨️कापालिक शैव–
👉इस संप्रदाय के अनुयायी भैरव के उपासक थे।
👉भैरव को भगवान शंकर का अवतार माना जाता है।
👉इस संप्रदाय का प्रमुख केंद्र श्री शैल नामक स्थान था।
👉इस संप्रदाय में भैरव को सुरा एवं नरबलि का नैवेद्य चढ़ाने की परंपरा थी।
♨️कालामुख शैव
👉यह सम्प्रदाय भी ‘कापालिक संप्रदाय‘ की तरह आसुरी प्रवृत्ति का था।
👉इस सम्प्रदाय के अनुयायियों को शिव पुराण में महाव्रतधर की संज्ञा दी गई है।
👉इस सम्प्रदाय के अनुयायी नर–कपाल में ही भोजन, जल एवं सुरापान करते थे।
♨️लिंगायत शैव
–
👉यह संप्रदाय दक्षिण भारत में प्रचलित था इस सम्प्रदाय को वीर शैव भी कहा गया है।
👉लिंगायत शैव अनुयायियों को जंगम भी कहा जाता था।
👉लिंगायत शैव के अनुयायी शिवलिंग की उपासना करते थे।
👉इस संप्रदाय का प्रवर्तन अल्लभ प्रभु तथा उनके शिष्य बासव ने किया था।
👉पेरिय पुराण के अनुसार दक्षिण भारत में नयनार संतों ने जिनकी संख्या 63 थी शैव स्रप्रदाय का प्रचार किया।
👉खजुराहो स्थित कंदरिया महादेव का मंदिर जिसका निर्माण चंदेल राजाओं द्वारा किया गया था, इस धर्म का प्रमुख प्रतिष्ठान है।
👉कैलाश नाथ मंदिर (एलोरा, निर्माता–राष्ट्रकूट वंश),
👉बृहदेश्वर मंदिर (तंजौर, निर्माता–राजाराज–1) आदि शैव धर्म के अन्य प्रसिद्ध प्रतिष्ठान हैं।
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