आज पढ़िए कौन है नारद मुनि,क्या कारण है उनका हमेशा नारायण-नारायण करने का..!!!

आज पढ़िए कौन है नारद मुनि,क्या कारण है उनका हमेशा नारायण-नारायण करने का..!!!

भगवान् विष्णु के साथ नारद मुनि

नारद मुनि तो आप सभी को याद ही होंगे किसी भी जगह उनका आगमन किसी खास उद्देश्य से, उनकी अपनी वीणा एवं नारायण – नारायण के भजन के साथ होता है। कई बार तो वे देवी देवताओ को आपस में लड़ा दिया करते थे। नारद मुनि सही समय पर सही जगह उपस्थित रहने के लिए जाने जाते हैं। नारद मुनि कोई साधारण मनुष्य नहीं हैं, अपितु पुराणों एवं वेदों के महाज्ञाता और एक महान संत हैं।नारद भगवान विष्णु के निष्ठावान सहायक थे। ऐसा कहा जाता है कि वह ब्रह्मा जी के पुत्र थे।

आज हम आपको बता रहे है कैसे बने वे एक महान ऋषि।प्रभास क्षेत्र में ऋषियों का एक आश्रम था जहा नन्द नामक एक दासी पुत्र उन ऋषियों की सेवा किया करते थे।धीरे धीरे नन्द का आश्रम में रहते हुए वैदिक वातावरण और उनकी सेवा भाव से समस्त पाप नष्ट होने लगा।उसका चित शुद्ध और पवित्र हो गया तथा वह अब भगवान की लीलाओ के गुणगान में व्यस्त रहने लगा।कुछ समय बाद ऋषियों ने आश्रम छोड़ नए स्थान पर जाने का निश्चय किया।जब नन्द को इस बात का पता लगा तो वे ऋषिगण के पास गए तथा उनसे बोले मैंने अनेक वर्षो तक आपकी सेवा करी है, आप मुझे अपने साथ ले चले।उसकी प्रेम भरी विनती सुन ऋषि बोले हम भी तुम से पृथक नही होना चाहते परन्तु इस संसार में तुम अकेले नही हो। तुम अपनी माता का एकमात्र सहारा हो सन्यास ग्रहण करने के लिए तुम उन्हें त्याग नही सकते,अतः तुम अपनी माता की सेवा करते हुए यही प्रभु भक्ति में ध्यान लगाओ।

भगवान् विष्णु के साथ नारद मुनि

एक दिन वन में सुखी लकड़ी बीनते समय नन्द की माता को एक साँप ने डस लिया और उनकी मृत्यु हो गई अब नन्द बिलकुल अकेला हो चूका था। नन्द ने भगवान विष्णु के चरणो में ध्यान लगाना शुरू किया उन्हें ऐसा करते हुए अनेक वर्ष बीत गए। अंततः भगवान विष्णु साक्षात नन्द के सामने प्रकट हुए तथा उनसे वरदान मागने के लिए कहा, नन्द भगवान विष्णु से बोले में आपके दुर्लभ दर्शन पाकर कृतार्थ हो गया व मेरे मन में कोई संसारिक इच्छा शेष नही रह गयी है।भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर उन्हें  वरदान दिया की तुम अगले जन्म में तीनो लोको में मेरे परम भक्त के रूप में प्रसिद्ध होगे। मेरे प्रति तुम्हारी निस्वार्थ भक्ति तुम्हे सदा के लिए अमर कर देगी, एक दिन नन्द ने श्री हरी के चरणो में अपने प्राण त्याग दिए।अगले जन्म में देवऋषि नारद ब्रह्मा जी के मानश-पुत्र के रूप में जन्मे तथा तीनो लोको में देवऋषि नारद के रूप में प्रसिद्ध हुए।

उनका जन्मदिन 22 मई को पत्रकार दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका कारण यह है कि उन्हें दुनिया का प्रथम संदेशवाहक माना जाता है।नारद मुनि मनुष्य, देवताओं एवं राक्षसों से सम्बंधित सभी घटनाओं से अवगत रहते हैं। उन्हें ‘भगवान का मन’ भी कहा जाता है।

।।नारायण – नारायण।।

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